वक्फ बिल 2 अप्रैल को लाना इत्तेफाक था, या मोदी सरकार का ट्रंप के टैरिफ से देशवासियों का ध्यान हटाकर हिन्दू मुस्लिम करने का प्लान?
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
बरेली, वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लाना इत्तेफाक था, या मोदी सरकार का ट्रंप के टैरिफ से देशवासियों का ध्यान हटाकर हिंदू मुस्लिम करने का प्लान था? जिसके तहत वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद लोकसभा में पास हो ही गया। वक्फ संशोधन बिल को वोटिंग के जरिए लोकसभा में विपक्ष के 239 वोटों के मुक़ाबले सत्ता पक्ष द्वारा 288 वोटों से लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल को पास करने में नीतीश, नायडू , जयंत, चिराग और मांझी का बड़ा योगदान
होने के कारण वक्फ संशोधन बिल रिजेक्ट कराने में विपक्ष ना काम रहा। जब कि पीएम नरेंद्र मोदी नितिन गडकरी ओम बिरला सहित अन्य दो सांसदों ने अपना वोट नहीं किया। ओम बिरला सदन में स्पीकर है उनका वोट उस समय आवश्यक होता है जब पक्ष और विपक्ष की वोटिंग बराबर हो ऐसे में स्पीकर अपने निर्णायक वोट का इस्तेमाल करते हैं। सत्ता पक्ष के पांच वोट ना पढ़ने के बावजूद लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल को पास कराने वाले धर्मनिरपेक्षता की चादर ने लिपटें सेकुलरिज्म के नाम पर मुसलमान का
वोट लेकर सत्ता सुख भोगने वाले नीतीश, नायडू, जयंत, चिराग और मांझी जैसे नेताओं को दिये गए मुस्लिम
वोटों का सीधे तौर पर भाजपा और संघ ने वक्फ संशोधन बिल पास कराने में जब इस्तेमाल कर ही लिया, तो मुसलमान को सेकुलरिज्म के नाम पर वोट देना बंद कर देना चाहिए। भाजपा और संघ को कोसने वाले मुसलमानों को सोचना होगा कि सेकुलरिज्म का ढिंढोरा पीटने वाली पार्टियों, एवं सत्ता और शासन के तलवे चाटने वाले मुस्लिम समाज को फिरकों और जातिवाद के नाम पर बांटने वाले स्वयंभू ढोंगी रहनुमाओं से सावधान होकर अपनी क़यादत और अपना क़ायद चुनकर सत्ता प्राप्ति की ओर कदम बढ़ाना होगा।
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