त्योहारों का उद्देश्य सामाजिक एकता आपसी मोहब्बत (दोस्ती) का प्रदर्शन ही ही त्योहारों का मक़सद है।

 रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी 

 त्योहारों का उद्देश्य सामाजिक एकता, आपसी मोहब्बत (दोस्ती)का प्रदर्शन ही त्योहारों का मकसद है और ये पूरा होता है एक साथ एकत्र होकर ईश्वर की प्रार्थना करने(नमाज़ पढ़ने),नफरत मिटाकर गले मिलने, एक साथ समय बिताने और एक दूसरे के घर जाकर साथ-साथ खाने पीने से.....चाहे होली हो या ईद, दिवाली हो या बकरीद! सबका मकसद एक है ईश्वर की प्रार्थना और आपसी मोहब्बत को बढ़ावा! 


अगर कोई अपने स्वार्थ, घमंड या अन्य किसी बुरे उद्देश्य से कुछ अलग करता है तो वह इन पवित्र त्योहारों के उद्देश्य में विघ्न डालता है! हमें त्योहारों के उद्देश्य को समझना चाहिए... यह रास्ता न देखें की कोई हमारे घर आए या खुद को श्रेष्ठ अथवा किसी स्तर से बड़ा न समझें ,हम खुद दूसरों के घर जाएं पूरी आत्मीयता के साथ प्रेम से लबरेज होकर अपने सामाजी भाइयों ,दोस्तों से गले मिलें , दिली बातें करें और एक सकारात्मक और समाज सुधारात्मक सोच पैदा कर उसपे काम करें! हम जितने विनम्र होते जाएंगे ईश्वर के उतने ही करीब होते जाएंगे, हमारे अंदर जितना घमंड और स्वार्थ होगा हम ईश्वर से उतना ही दूर होंगे!


हमें विनम्रता और प्रेम को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए स्वार्थ, घमंड, लोभ का त्याग कर दूसरों के काम आना चाहिए ...यही धर्म कहता है और यही त्योहारों का उद्देश्य है!

सियासत चाहती है फिजाओं में नफरत!

हमारा   काम  है  फैलाएं  मोहब्बत!

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