बहादुर शाह ज़फ़र की यऔमएं पैदाइश पर कांग्रेस की ओर से ख़िराजे हकीकत पेश की गई,
रिपोर्ट-मुस्तकीम मंसूरी
कितना बदनसीब है तू ऐ ज़फर दफ़न के लिये
दो गज़ ज़मीं भी ना मिली कूए यार मे-क़मर ग़नी
फरीदपुर, जनपद बरेली में उत्तर प्रदेश काँग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के सम्मानित चेयरमैन जनाब शाहनवाज आलम के निर्देशानुसार मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर की यौमे पैदाइश पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण स्मरण एवं खिराज ए अकीदत पेश किये गये । यह कार्यक्रम अल्पसंख्यक काँग्रेस के फरीदपुर कार्यालय पर आयोजित किया गया।
इस अवसर पर बहादुर शाह ज़फर को याद करते हुये अल्पसंख्यक काँग्रेस के जिलाध्यक्ष क़मर ग़नी ने कहा कि 1857 मे देश की आजा़दी के लिये अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह मे अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के नेतृत्व मे सभीक्रांतिकारियों ने एक जुट होकर भारत की आजा़दी की लड़ाई लड़ी आखिर मे उनको अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया एवं उनको रंगून की जेल मे डाल दिया वहीं उन्होने आखिरी सांस ली
वे एक शासक के साथ एक शायर भी थे उन्होने आखिरी वक्त मे यह शेर कहे थे
बुलबुल को बागबां से ना सय्याद से गिलाकिस्मत मे क़ैद लिक्खी थी फ़स्ल ए बहार मे।
कितना है बदनसीब ऐ ज़फर दफ़्न के लिये
दो गज़ ज़मीं भी ना मिली कू-ए-यार मे। वे एक सच्चे देशभक्त थे उनकी इस अज़ीम कुर्बानी को भुलाया नही जा सकता।
इस अवसर पर काँग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो.अलाउद्दीन ने कहा की बहादुर शाह ज़फर एक सच्चे देशभक्त थे जेल मे अंग्रेजों ने उनके दोनों बेटों के सर कलम कर के सुबह को नाश्ते की तश्तरी मे उनके आगे पेश किये तब उन्होने कहा कि मै देश के लिये सौ बेटों को भी कुर्बान करने को तैय्यार हूँ लेकिन मुझे अंग्रजों की ग़ुलामी मंजूर नही।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अल्पसंख्यक कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष तनवीर अहमद खान,हाफिज़ मोहम्मद आशिक,सद्दाम कुरैशी,मोहम्मद समीर,अनस अली ,ताहिरअली,रिजवान कुरैशी,अनस अली,दुर्गेश मौर्य ,डा.शादाब,सैफ़ आलम इरफान आदि लोग उपस्थित रहे।
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